अनुसंधान शोध पत्रिका

अनुसंधान शोध 
त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका

संपादक
डॉ. शगुफ्ता नियाज़
असि. प्रोफ़ेसर हिन्दी
वीमेन्स कॉलेज,
अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्द्यालय, अलीगढ़
सलाहकार संपादक
डॉ. एम. फ़ीरोज़ अहमद
हिन्दी विभाग,
हलीम मुस्लिम पी.जी. कॉलेज,
चमनगंज, कानपुर
+91 9044918670
 परामर्श मंडल
प्रो. रामकली सराफ (बी.एच.यू.)
मूलचन्द सोनकर (वाराणसी)
डॉ. मेराज अहमद (ए. एम. यू., अलीगढ़)

अनुसंधान शोध त्रैमासिक: जुलाई - सितम्बर २०१५

12/07/2015, 11:04 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 12/07/2015, 11:10 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रम
  • बलराम - समकालीन कवयित्रियों का स्त्री-विमर्श / 6
  • मंजू बाला - सांस्कृतिक परिवेश के संदर्भ मंे श्री नरेश मेहता का साहित्य / 11
  • सतीश कुमार - तमस और साम्प्रदायिकता की समस्या / 15
  • नीलम रानी - पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ के उपन्यासों में चित्रित समस्याएँ / 19
  • संजीव कुमार विश्वकर्मा - भक्तिकालीन सामाजिक आन्दोलन और कबीर का गतिशील नेतृत्व / 22
  • मीनाक्षी - इक्कीसवीं सदी के प्रथम दशक के हिन्दी उपन्यासों में सामाजिक मूल्यों का विघटन / 26
  • राहुल शर्मा - समकालीन कविता और चन्द्रकान्त देवताले का काव्य ;खुद पर निगरानी का वक्त के विशेष संदर्भ मेंद्ध / 30
  • ज्योति - विवेकीराय के ललित निबंधों में लोक संस्कृति का चित्रण / 33
  • आरती - लोक मान्यता और श्रीनरेश मेहता का साहित्य / 37
  • ख्याति सोनी - लोकजीवन के प्रखर गायक अष्टछाप के कवि सूरदास / 41
  • डाॅ. व्ही. आई. शेख - नई सदी की कविता: स्त्री विमर्श / 45
  • डाॅ. मीनू अवस्थी - हिन्दी भाषा शिक्षण में मल्टीमीडिया की भूमिका / 47
  • जय प्रकाश पाण्डेय - स्कंदगुप्त में राष्ट्रीय विमर्श के प्रश्न / 49
  • डाॅ. सीमा रायकवार - बुन्देली लोक संगीत / 52
  • दीपमाला कोरी - महिला उपन्यास लेखन में स्त्री विमर्श की झलक / 54
  • गणेश शर्मा - दलित मुक्ति-चेतना और अम्बेडकर / 57
  • डाॅ. पूजा - नासिरा शर्मा के उपन्यास साहित्य का परिचय / 60
  • रिंकल उपाध्याय - भोजपुरी के लोकनाटकों मंे व्याप्त सांस्कृतिक चेतना / 64
  • गौतम कुमार भारती - अक्षर अनन्य के साधना का उद्देश्य / 66
  • सुमन रानी - नरेन्द्र मोहन का काव्य: नारी संवेदना / 68
  • लक्ष्मी शर्मा - कविवर उदयभानु हंस का काव्य: मानवतावादी दृष्टिकोण / 72
  • सौरभ कुमार - नागार्जुन की लोक चेतना / 76
  • श्रुति सुधा आर्या - अभिमन्यु अनत के काव्य मंे मानव मूल्य / 79 
  • मोनिका हंस - श्री हित ध्रुवदास के काव्य में प्रेम का स्वरूप / 83
  • डाॅ. मंजू बाला - जन-संवेदना से सराबोर हिन्दी नवगीत / 88
  • लवलीन कौर - हिन्दी के श्रेष्ठ निबन्धकार: कुबेरनाथ राय: एक परिचय / 92
  • डाॅ. शालिगराम अहिरवार - सामाजिक चेतना: श्रीरामकृष्ण परमहंस के परिप्रेक्ष्य में / 95
  • डाॅ. कामिनी साहिर- प्रवास के दर्द का प्रामाणिक दस्तावेज - बसरा की गलियाँ / 98

अनुसंधान शोध त्रैमासिक: जनवरी - जून २०१५

18/03/2015, 7:04 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 18/03/2015, 7:20 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रम
  • डा. विजेन्द्र प्रताप सिंह - पिछले पन्ने की औरतें और बेडि़या आदिवासी स्त्रियाँ / 6
  • सुकीर्ति - सुरेन्द्र वर्मा के साहित्य में कामकाजी नारी / 12
  • डा. देवकीनंदन महाजन - समकालीन हिन्दी उपन्यास साहित्य में स्त्री / 16
  • प्रियंका - महानगरीय बोध के सन्दर्भ में एक जमीन अपनी उपन्यास का विश्लेषण / 18
  • भावना चतुर्वेदी - हिन्दी साहित्य में साम्प्रदायिक सद्भाव का स्वरूप / 21
  • डा. बी. एम. द्विवेदी - साहित्य का सामाजिक सरोकार, संस्कृति व बिखरते मूल्य / 24
  • राम प्रवेश रजक - शिवानी के उपन्यासों में स्त्री-एक अध्ययन / 28
  • डा. राम आसरे - अरजरिया-तुलसी काव्य में लोक भक्ति / 30
  • सौरभ कुमार - हिन्दी कथा साहित्य में राम: परम्परा एवं प्रयोग / 34
  • भावना चतुर्वेदी - राही मासूम रज़ा: एक सच्चा हिन्दुस्तानी / 37
  • डा. श्रीमती उर्मिला रावत - बुन्देली विवाह गीतों में रामकथा / 40
  • डा. नीरज कुमार नामदेव - सामाजिक चेतना की परिवर्तनशीलता / 43
  • डा. संतोष राजपाल - नारी की तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियाँ / 46
  • प्रो. डी. के. शर्मा - शिक्षा और आर्थिक विकास / 49
  • रतन सिंह - भारतीय जनप्रतिनिधियों का असंसदीय आचरण: एक चुनौती / 51
  • डा. शंकर ए. राठोड - दलित साहित्यकारों के कहानियों में चित्रित दलित जीवन / 53
  • कुलदीप जनागल - स्वातंत्र्योत्तर कृष्णकथात्मक प्रबंध काव्य में दलित-विमर्श / 59
  • डा. कामिनी साहिर - अमृतलाल नागर के उपन्यास ’महाकाल’ में नारी / 62
  • श्वेता - 21वीं सदी के प्रथम दशक के कहानी साहित्य में व्यक्त राजनीतिक युगबोध / 67
  • संगम वर्मा - गीता एक आध्यात्मिक दस्तावेज / 71
  • सुमन रानी - भवानी प्रसाद मिश्र के काव्य में प्रकृति-चित्रण / 73
  • सुमन देवी - गोदान और रंगभूमि में प्रेमचंद का आर्थिक चिंतन / 77
  • डा. श्रीमती चेतना दुबे - वृक्ष की महत्ता / 82

अनुसंधान शोध त्रैमासिक: अक्तूबर - दिसम्बर २०१४

19/12/2014, 9:27 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 19/12/2014, 9:30 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रम
anusandhan-shodh-patrika-october-december-2014

अनुसंधान शोध त्रैमासिक: जुलाई - सितम्बर २०१४

24/09/2014, 12:35 pm द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 19/12/2014, 9:29 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रम
  • ऐतिहासिकता बनाम बशारत मंजि़ल - डाॅ. एम. फ़ीरोज़ खान
  • आदर्श और यथार्थ का अद्भुत मिश्रण उपन्यास-अपवित्र आख्यान - अंकित
  • हरिजन गाथा: अग्निपुत्रों का क्रांतिकारी आह्वान - अरूण प्रसाद रजक
  • डाॅ. भीमराव अम्बेडकर की व्यक्तित्व एवं सामाजिक परिवर्तन में उनका योगदान - डाॅ. हरिनाथ
  • गीतांजलि श्री की कहानियों में पर्यावरण चेतना - डाॅ. राजेश्वरी
  • स्वातंत्र्योत्तर मिथकीय खण्ड काव्यों में आधुनिक भावबोध - डाॅ. एन. टी. गामीत
  • प्रयोजनमूलक हिंदी की अवधारणा एवं विकास - सुजाता जन्नू
  • राष्ट्र भाषा हिंदी का न्यायिक स्वरूप - डाॅ. विनीता शुक्ला
  • २१वीं सदी के साहित्य में दलित-विमर्श - दुर्गा खत्री
  • छायावादी काव्य में नारी - प्रा. बालु भोपू राठोड
  • भारतीय संविधान और राजभाषा हिंदी - डाॅ. रजनी चैबे
  • विभक्त परिवार का बंटी - डाॅ. हर्षद कुमार चैहान
  • शब्द का सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य - अमित कुमार शर्मा
  • रामदरश मिश्र का कृतित्त्व: एक अध्ययन - कैलाशकुमार गढ़वी
  • केशव प्रसाद मिश्र कृत क्या रोशनी मौत है उपन्यास का विश्लेषण - राजेश यादव
  • बाज़ारीकरण-भूमण्डलीयकरण का जाल: स्त्री विमर्श - संगम वर्मा
  • समकालीन परिप्रेक्ष्य में हिंदी का वैज्ञानिक साहित्य सृजन - डाॅ. के. आशा
  • २१वीं शती की हिंदी कविता में समाज सापेक्षता - अंकुश जाधव
  • बातां री फुलवाड़ी में मानवता - सुनीला छापर / डाॅ. सुमन शर्मा
  • देवर्षि कलानाथ शास्त्री रचित संस्कृत नाट्यवल्लरी में ध्वनि प्रभाव - अर्चना सिंह चैधरी / प्रो. मीरा शर्मा
  • धर्मशास्त्रीय वर्ण व्यवस्था एवं सामाजिक प्रबंधन - पूजा गौतम / प्रो. मीरा शर्मा
  • कहानीकार चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ - राजकौर
  • अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में हिंदी - डाॅ. तसनीम पटेल
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अनुसंधान शोध त्रैमासिक: अप्रैल-जून २०१४

18/05/2014, 7:41 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 18/05/2014, 7:44 am अपडेट किया गया ]

anusandhan-shodh-traiasik-patrika-april-june-2014
अनुक्रम

  • सम्पादकीय
  • आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के स्त्री-विमर्श संबंधी विचार - दिनेश कुमार
  • हिंदी के आंचलिक उपन्यासों में सामाजिक मूल्य अवमूल्यन - डॉ. बबीता तंवर
  • हिन्दी कहानी : साम्प्रदायिक समता का दर्शन - धयागुडे हनुमंत विट्ठलराव
  • आत्मकथा के उद्भव और विकास में आर्य सम्माज सेवकों का योगदान - खुशबू
  • हिन्दी कथा साहित्य में अल्पसंख्यक समाज की स्थिति एवं संभावनाएं - करिश्मा अय्यूब पठाण
  • आछरी-माछरी में स्त्री संघर्ष का आख्यान - अखिलेश कुमार
  • प्रगतिशील कवि नागार्जुन और उनकी कविताओं में व्यंग्य - कविता भदौरिया
  • मध्यकालीन नारी जीवन की पीड़ा की अभिव्यक्ति निष्कृति - प्रा. श्रीमती उषा पुंडलिक शिरोडे
  • आधुनिक युग के शैक्षिक क्षेत्र में भारतीय नारी के आदर्श - एन. मोहना
  • आदिवासी जीवन का यथार्थ : जंगल जहाँ शुरू होता है - प्रा. बालाजी बलीराम गरड
  • आधुनिक स्त्री विमर्श : एक विश्लेषण - डॉ. संजीव सिंह 
  • सामाजिक क्रान्ति के आईने में दलित विमर्श : उपन्यास के संदर्भ में - निकाल्जे भूपेंद्र सर्जेराव
  • उत्तराखण्ड की बुक्सा जनजाति एवं उनकी चुनौतियाँ - कौस्तुबा नंद जोशी
  • मैत्रेयी पुष्पा के उपन्यास में नारियों का बदलता स्वरुप - रूबी यादव
  • हिंदी की सामासिक संस्कृति की परंपरा में पद्मावत् और वर्तमान समय - युसूफ अली 
  • हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन में आचार्य भगीरथ मिश्र का अवदान - सुभाष चंद्र यादव
  • नारी स्मिता की तलाश : कोमल गांधार - डॉ. हर्षदकुमार चौहान
  • डॉ. शंकर पुणतांबेकर के बुद्धिजीवी निबंध की भाषा शैली - डॉ. सचिन कदम
  • नवजागरण एवं हिन्दी नवजागरण - दुर्गेश यादव
  • विज्ञापन और हिन्दी - डॉ. सुरेश पटेल
Keywords : Anusandhan shodh hindi patrika, traimasik, Vangmay Books, Aligarh

अनुसंधान शोध त्रैमासिक: जनवरी-मार्च २०१४

19/03/2014, 1:36 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 19/03/2014, 1:40 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रमanusandhan shodh traimasik hindi patrika, aligarh
  • सम्पादकीय
  • विज्ञापनों में हिन्दी का स्वरुप - डॉ. नग़मा जावेद मालिक
  • कालीदास के साहित्य में त्याग और तपोवन - डॉ. हितेश चौरे
  • काली दीवार: एक अध्ययन - राजेश यादव
  • कुबेरनाथ राय के निबंधों की शैली - मारकन्डे पाठक
  • विवेक राय के काव्य में यथार्थ के स्वर - डॉ. दीपक कुमार
  • समकालीन हिन्दी कथा साहित्य में साम्प्रदायिक मनोवृत्ति - डॉ. हरिनाथ
  • कहर, कसक और कश्मीर - डॉ. ज़ाहिदा जबीन
  • आचार्य नंददुलारे वाजपेयी का शिक्षा-संबंधी विवेचन - मनोज कुमार सिल
  • उत्तर-आधुनिकतावाद: साहित्यिक सन्दर्भ में - सौरभ कुमार
  • समकालीन महिला-नाटककारों के नाटकों में में युग-चेतना - डॉ. दयाल प्यारी सिंहा
  • अकविता के सन्दर्भ में जगदीश चतुर्वेदी का काव्य - दलबीर सिंह
  • नारी मानवाधिकार: सुशीला टाकभौरे की आत्मकथा - वंदना शर्मा
  • झोपड़ पट्टी: जीवन का यथार्थ - बबीता भण्डारी
  • मंजुल भगत की कहानियों में कामकाजी नारी की संवेदना - डॉ. शेख़ शहनाज़ अहमद
  • वैश्वीकरण के सन्दर्भ में हिन्दी: दशा और दिशा - अखिलेश कुमार
  • आदिवासी कविताओं में प्रतिरोध का स्वर - डॉ. एन. टी. गामीत
  • जीवन मूल्यों के क्षरण की दास्तान: रेगिस्तान - डॉ. रेशमा बेगम
  • इस्लाम की रोशनी में स्त्री विमर्श: ख़ुदा की वापसी - डॉ. इक़रार अहमद
  • बौद्ध धर्म का आध्यत्मिक पक्ष और हिन्दी लेखन - डॉ. श्री प्रकाश यादव
Keywords : Anusandhan shodh hindi patrika, traimasik, Vangmay Books, Aligarh

अनुसंधान शोध त्रैमासिक: अक्तूबर-दिसम्बर २०१३

05/02/2014, 11:57 pm द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 06/02/2014, 12:01 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रम 
anusandhan shod traimasik- vanngmay books aligarh
  • सम्पादकीय
  • हिन्दी के महत्वपूर्ण प्रेम कवि: अशोक बाजपेयी - प्रकाश
  • हिन्दी कथा: उद्भव, परिभाषा एवं स्वरुप - यशपाल सिंह रावत
  • नचिकेता का स्त्री विमर्श - आकाश वर्मा
  • रीतिकालीन समाज में नारी - डॉ. विनीता शुक्ला
  • नारी की मुक्ति - डॉ. गीता सिंह
  • दलित साहित्य और साहित्यकार: एक विवेचनात्मक विश्लेषण - डॉ. अमित शुक्ल
  • प्रेमचंद एवं बामा की कहानियों में दलित - डॉ. सफराम्मा तिरुनेलवेली
  • हबीब तनवीर के नाटकों के संवादों में लोकरंग और बिम्ब योजना - विनीता त्यागी
  • नरेश मेहता की काव्य दृष्टि - डॉ. मंजरी गुप्ता
  • हिन्दी उपन्यासों में ग्रामीण यथार्थ - मोहम्मद साजिद मजीद
  • एक जिंदगी ऐसी भी - प्रा. बाबासाहेब माने
  • महादेवी के काव्य में दार्शनिक चिंतन - अनीता आर्या
  • हिन्दी सूफी काव्य में प्रयुक्त कथानक रूढ़ियाँ - अफ़ज़ाल अहमद
  • महादेवी काव्य में रहस्यानुभूति - विकास कुमार
  • विरक्ति और वैराग्य के विरोध के सन्दर्भ में हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्य - निर्मला देवी
  • नज़ीर अकबराबादी की धार्मिक चिंतनधारा - जाविद अली
  • मनोहर श्याम जोशी के उपन्यासों की व्यंग्यात्मकता - संगम वर्मा
  • मेरी भव बाधा हरो में: परंपरा और स्त्री विमर्श - माला कुमारी
  • नरेन्द्र मोहन: व्यक्तित्व एवं कृतित्व - श्रीमती वनदेवी दु. हुच्चण्णवर 
Keywords : Anusandhan shodh hindi patrika, traimasik, Vangmay Books, Aligarh

अनुसंधान शोध त्रैमासिक: जुलाई-सितम्बर २०१३

04/02/2014, 1:17 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 06/02/2014, 12:04 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रम 
Anusandhan Hindi Traimasik Shodh patrika
  • हिन्दी अस्मितामूलक पत्रकारिता का संकट एवं चुनौतियां - डॉ. (श्रीमती) के.के. रवि
  • बच्चन कृत मधुशाला का अनुभूति पक्ष: एक अध्ययन - कनुभाई करशनभाई भवा
  • महिला लेखन: विविध पहलू - डॉ. रीतू बहनोट
  • छायावादोत्तर हिन्दी कविता और जीवन मूल्य - निधि नागर / डॉ. कमलेश कुमारी रवि
  • कुँवर नारायण के काव्य में राजनीतिक चेतना - डॉ. पवन कुमार
  • तमस: देश विभाजन की एक हृदयद्रावक त्रासदी - प्रा. भरतभाई बावलिया
  • २०वीं सदी के अंतिम दशक के महिला उपन्यासकारों के उपन्यासों के विविध आयाम - प्रा. डॉ. ज्योति मुंगल
  • आधुनिक हिन्दी कथाओं में दलित संवेदना - रमेश मनोहर लमाणी
  • सुरेन्द्र वर्मा के उपन्यासों में सांस्कृतिक विघटन - श्री टी. टी. लमाणी
  • हिन्दी नवजागरण की अवधारणा - डॉ. सय्यद एक़बाल मजाज़
Keywords : Anusandhan shodh hindi patrika, traimasik, Vangmay Books, Aligarh

अनुसंधान शोध त्रैमासिक: अप्रैल-जून २०१३

04/02/2014, 12:20 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 19/12/2014, 9:28 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रम 
  • हिन्दी अस्मितामूलक पत्रकारिता का संकट एवं चुनौतियां - डॉ. (श्रीमती) के. के. रवि
  • बच्चन कृत मधुशाला का अनुभूति पक्ष: एक अध्ययन - कनुभाई करशनभाई भवा
  • महिला लेखन: विविध पहलू - डॉ. रीतू बहनोट
  • छायावादोत्तर हिन्दी कविता और जीवन मूल्य - निधि नागर / डॉ. कमलेश कुमारी रवि
  • कुँवर नारायण के काव्य में राजनीतिक चेतना - डॉ. पवन कुमार
  • तमस: देश विभाजन की एक हृदयद्रावक त्रासदी - प्रा. भरतभाई बावलिया
  • २०वीं सदी के अंतिम दशक के महिला उपन्यासकारों के उपन्यासों के विविध आयाम - प्रा. डॉ. ज्योति मुंगल
  • आधुनिक हिन्दी कथाओं में दलित संवेदना - रमेश मनोहर लमाणी
  • सुरेन्द्र वर्मा के उपन्यासों में सांस्कृतिक विघटन - श्री टी. टी. लमाणी
  • हिन्दी नवजागरण की अवधारणा - डॉ. सय्यद एक़बाल मजाज़
  • आत्मकथा: अनुभूति, यथार्थ और प्रतिक्रिया - डॉ. आनंद सिंदल
  • धरती धन न अपना उपन्यास में दलित चेतना - प्रा. गोविंद कुमार बेकरीया
  • रामदरश मिश्र के उपन्यासों में लोकगीत - प्रा. बसावा आनंदभाई दामजीभाई
  • निराला के काव्य में यथार्थ चेतना - प्रा. गामीत अनसुयाबेन अर्जुनभाई
  • मार्क्सवादी विचारधारा के परिप्रेक्ष्य में अब्दुल बिस्मिल्लाह के उपन्यासों के अध्ययन - अभिषेक कुमार पाण्डेय
  • आदिवासी समाज और शिक्षा - डॉ. भगवानसिंह जे. सोलंकी
  • विद्द्यार्थियों की सृजनशीलता का उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर प्रभाव - डॉ. शोभनी श्रीवास्तव / डॉ. ज्योत्सना भटनागर
Keywords : Anusandhan shodh hindi patrika, traimasik, Vangmay Books, Aligarh

अनुसंधान, वर्ष-३, अंक ११-१२, अक्तूबर २०१२ - मार्च २०१३

03/02/2014, 11:41 pm द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 03/02/2014, 11:49 pm अपडेट किया गया ]

अनुक्रम 
  • पित्त्सत्ता के बरक्स महिला उपन्यासकार - डा. संजीव कुमार जैन
  • मंटो के कथा साहित्य पर अश्लीलता का आक्षेप - मो. इसरार
  • चित्रा मुद्गल की कहानियों में नारी-जीवन - पर्वज्योति कौर
  • बुनकरों के जीवन संघर्ष की कथा: झीनी-झीनी बीनी चदरिया - डा. सत्या सोनी
  • प्रेमचंद साहित्य में चित्रित प्रेम एवं सत्य - डा. ममता ध्यानी
  • निर्मला सिंह का कथा साहित्य: सामाजिक परिवेश के परिप्रेक्ष्य में - चांदनी गौड़ / प्रो. शर्मिला सक्सेना
  • देहाती एवं शहरी जनजीवन की समस्याओं का अद्भुत समन्वय - प्रा. जयराम श्री सूर्यवंशी
  • राष्ट्रभाषा हिन्दी: कितनी सही कितनी प्रेरक - डॉ. प्रमोद गोकुल पाटील
  • हिन्दी कहानी में अकहानी आन्दोलन एक विमर्श - डॉ. जिज्ञेश के सुमरा
  • कविता अस्त्र या कवच - डॉ. श्री प्रकाश यादव
  • भगवत रावत के काव्य में जीवन का सौंदर्य - डॉ. शंकर शर्मा
  • शैली (शिल्प) के विषय में प्राचीन भारतीय विद्वानों का मत - स्मिता सिंह
  • हिन्दी कविता में आत्महंता प्रवृत्ति - डॉ. निधि कश्यप
  • साठोत्तर हिन्दी और कन्नड़ के प्रमुख नाटकों में नारी शोषण - प्रो. बी. एस. राठोड
  • आत्मीयता की तलाश में एक लेखक: रचना के बदले - निरुपमा कपूर
  • डॉ. शीलधर सिंह की काव्य साधना - डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह
  • नव संस्कृति के संवाहक के रूप में मीडिया की भूमिका - भारती मुछाल
  • वैश्वीकरण की दशा में हिन्दी - डॉ. नीलाम्बिके एस. पाटिल
  • स्वतंत्रता पूर्व राष्ट्रभाषा हिन्दी का स्वरुप - डॉ. नसीम फातिमा
  • साहित्यकार की प्रतिबद्धता - बशीरुद्दीन एम. मदरी
  • १९वीं सदी के उपन्यास : एक विश्लेषण - डॉ. एल. पी. लमाणी
  • महिला आत्मकथाएं, प्रतिशोध के स्वर - डॉ. सुरेन्द्र कुमार
  • डॉ. अम्बेडकर के सामाजिक एवं राजनीतिक ...व्यवस्था व सरकार का सिद्धांत - डॉ. मो. आबिद अंसारी
Keywords : Anusandhan patrika, traimasik, Vangmay Books, Aligarh

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