अनुसंधान शोध त्रैमासिक: जुलाई - सितम्बर २०१४

24/09/2014, 12:35 pm द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 19/12/2014, 9:29 am अपडेट किया गया ]
अनुक्रम
  • ऐतिहासिकता बनाम बशारत मंजि़ल - डाॅ. एम. फ़ीरोज़ खान
  • आदर्श और यथार्थ का अद्भुत मिश्रण उपन्यास-अपवित्र आख्यान - अंकित
  • हरिजन गाथा: अग्निपुत्रों का क्रांतिकारी आह्वान - अरूण प्रसाद रजक
  • डाॅ. भीमराव अम्बेडकर की व्यक्तित्व एवं सामाजिक परिवर्तन में उनका योगदान - डाॅ. हरिनाथ
  • गीतांजलि श्री की कहानियों में पर्यावरण चेतना - डाॅ. राजेश्वरी
  • स्वातंत्र्योत्तर मिथकीय खण्ड काव्यों में आधुनिक भावबोध - डाॅ. एन. टी. गामीत
  • प्रयोजनमूलक हिंदी की अवधारणा एवं विकास - सुजाता जन्नू
  • राष्ट्र भाषा हिंदी का न्यायिक स्वरूप - डाॅ. विनीता शुक्ला
  • २१वीं सदी के साहित्य में दलित-विमर्श - दुर्गा खत्री
  • छायावादी काव्य में नारी - प्रा. बालु भोपू राठोड
  • भारतीय संविधान और राजभाषा हिंदी - डाॅ. रजनी चैबे
  • विभक्त परिवार का बंटी - डाॅ. हर्षद कुमार चैहान
  • शब्द का सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य - अमित कुमार शर्मा
  • रामदरश मिश्र का कृतित्त्व: एक अध्ययन - कैलाशकुमार गढ़वी
  • केशव प्रसाद मिश्र कृत क्या रोशनी मौत है उपन्यास का विश्लेषण - राजेश यादव
  • बाज़ारीकरण-भूमण्डलीयकरण का जाल: स्त्री विमर्श - संगम वर्मा
  • समकालीन परिप्रेक्ष्य में हिंदी का वैज्ञानिक साहित्य सृजन - डाॅ. के. आशा
  • २१वीं शती की हिंदी कविता में समाज सापेक्षता - अंकुश जाधव
  • बातां री फुलवाड़ी में मानवता - सुनीला छापर / डाॅ. सुमन शर्मा
  • देवर्षि कलानाथ शास्त्री रचित संस्कृत नाट्यवल्लरी में ध्वनि प्रभाव - अर्चना सिंह चैधरी / प्रो. मीरा शर्मा
  • धर्मशास्त्रीय वर्ण व्यवस्था एवं सामाजिक प्रबंधन - पूजा गौतम / प्रो. मीरा शर्मा
  • कहानीकार चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ - राजकौर
  • अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में हिंदी - डाॅ. तसनीम पटेल
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वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़,
24/09/2014, 12:35 pm