अनुसंधान, वर्ष-३, अंक ११-१२, अक्तूबर २०१२ - मार्च २०१३

3 फ़र॰ 2014, 11:41 pm द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 3 फ़र॰ 2014, 11:49 pm अपडेट किया गया ]
अनुक्रम 
  • पित्त्सत्ता के बरक्स महिला उपन्यासकार - डा. संजीव कुमार जैन
  • मंटो के कथा साहित्य पर अश्लीलता का आक्षेप - मो. इसरार
  • चित्रा मुद्गल की कहानियों में नारी-जीवन - पर्वज्योति कौर
  • बुनकरों के जीवन संघर्ष की कथा: झीनी-झीनी बीनी चदरिया - डा. सत्या सोनी
  • प्रेमचंद साहित्य में चित्रित प्रेम एवं सत्य - डा. ममता ध्यानी
  • निर्मला सिंह का कथा साहित्य: सामाजिक परिवेश के परिप्रेक्ष्य में - चांदनी गौड़ / प्रो. शर्मिला सक्सेना
  • देहाती एवं शहरी जनजीवन की समस्याओं का अद्भुत समन्वय - प्रा. जयराम श्री सूर्यवंशी
  • राष्ट्रभाषा हिन्दी: कितनी सही कितनी प्रेरक - डॉ. प्रमोद गोकुल पाटील
  • हिन्दी कहानी में अकहानी आन्दोलन एक विमर्श - डॉ. जिज्ञेश के सुमरा
  • कविता अस्त्र या कवच - डॉ. श्री प्रकाश यादव
  • भगवत रावत के काव्य में जीवन का सौंदर्य - डॉ. शंकर शर्मा
  • शैली (शिल्प) के विषय में प्राचीन भारतीय विद्वानों का मत - स्मिता सिंह
  • हिन्दी कविता में आत्महंता प्रवृत्ति - डॉ. निधि कश्यप
  • साठोत्तर हिन्दी और कन्नड़ के प्रमुख नाटकों में नारी शोषण - प्रो. बी. एस. राठोड
  • आत्मीयता की तलाश में एक लेखक: रचना के बदले - निरुपमा कपूर
  • डॉ. शीलधर सिंह की काव्य साधना - डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह
  • नव संस्कृति के संवाहक के रूप में मीडिया की भूमिका - भारती मुछाल
  • वैश्वीकरण की दशा में हिन्दी - डॉ. नीलाम्बिके एस. पाटिल
  • स्वतंत्रता पूर्व राष्ट्रभाषा हिन्दी का स्वरुप - डॉ. नसीम फातिमा
  • साहित्यकार की प्रतिबद्धता - बशीरुद्दीन एम. मदरी
  • १९वीं सदी के उपन्यास : एक विश्लेषण - डॉ. एल. पी. लमाणी
  • महिला आत्मकथाएं, प्रतिशोध के स्वर - डॉ. सुरेन्द्र कुमार
  • डॉ. अम्बेडकर के सामाजिक एवं राजनीतिक ...व्यवस्था व सरकार का सिद्धांत - डॉ. मो. आबिद अंसारी
Keywords : Anusandhan patrika, traimasik, Vangmay Books, Aligarh
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वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़,
3 फ़र॰ 2014, 11:45 pm