अनुसंधान शोध त्रैमासिक: अप्रैल-जून २०१४

18 मई 2014, 7:41 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 18 मई 2014, 7:44 am अपडेट किया गया ]
anusandhan-shodh-traiasik-patrika-april-june-2014
अनुक्रम

  • सम्पादकीय
  • आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के स्त्री-विमर्श संबंधी विचार - दिनेश कुमार
  • हिंदी के आंचलिक उपन्यासों में सामाजिक मूल्य अवमूल्यन - डॉ. बबीता तंवर
  • हिन्दी कहानी : साम्प्रदायिक समता का दर्शन - धयागुडे हनुमंत विट्ठलराव
  • आत्मकथा के उद्भव और विकास में आर्य सम्माज सेवकों का योगदान - खुशबू
  • हिन्दी कथा साहित्य में अल्पसंख्यक समाज की स्थिति एवं संभावनाएं - करिश्मा अय्यूब पठाण
  • आछरी-माछरी में स्त्री संघर्ष का आख्यान - अखिलेश कुमार
  • प्रगतिशील कवि नागार्जुन और उनकी कविताओं में व्यंग्य - कविता भदौरिया
  • मध्यकालीन नारी जीवन की पीड़ा की अभिव्यक्ति निष्कृति - प्रा. श्रीमती उषा पुंडलिक शिरोडे
  • आधुनिक युग के शैक्षिक क्षेत्र में भारतीय नारी के आदर्श - एन. मोहना
  • आदिवासी जीवन का यथार्थ : जंगल जहाँ शुरू होता है - प्रा. बालाजी बलीराम गरड
  • आधुनिक स्त्री विमर्श : एक विश्लेषण - डॉ. संजीव सिंह 
  • सामाजिक क्रान्ति के आईने में दलित विमर्श : उपन्यास के संदर्भ में - निकाल्जे भूपेंद्र सर्जेराव
  • उत्तराखण्ड की बुक्सा जनजाति एवं उनकी चुनौतियाँ - कौस्तुबा नंद जोशी
  • मैत्रेयी पुष्पा के उपन्यास में नारियों का बदलता स्वरुप - रूबी यादव
  • हिंदी की सामासिक संस्कृति की परंपरा में पद्मावत् और वर्तमान समय - युसूफ अली 
  • हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन में आचार्य भगीरथ मिश्र का अवदान - सुभाष चंद्र यादव
  • नारी स्मिता की तलाश : कोमल गांधार - डॉ. हर्षदकुमार चौहान
  • डॉ. शंकर पुणतांबेकर के बुद्धिजीवी निबंध की भाषा शैली - डॉ. सचिन कदम
  • नवजागरण एवं हिन्दी नवजागरण - दुर्गेश यादव
  • विज्ञापन और हिन्दी - डॉ. सुरेश पटेल
Keywords : Anusandhan shodh hindi patrika, traimasik, Vangmay Books, Aligarh
Ċ
वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़,
19 मई 2014, 7:36 pm
Comments