वाङ्मय पत्रिका

वाङ्मय त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका
 
सम्पादक
डॉ. एम. फ़ीरोज़ अहमद
मोबाइल : 9044918670
सलाहकार सम्पादक
डॉ. मेराज अहमद
परामर्श मण्डल
प्रो. रामकली सराफ (बी.एच.यू.)
मूलचन्द सोनकर (वाराणसी)
डॉ. शगुफ़्ता नियाज़ (अलीगढ़)
डॉ. ए. के. पाण्डेय (कानपुर)

वाङ्मय त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका - अक्तूबर २०१४

19 दिस॰ 2014, 9:19 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 9 दिस॰ 2015, 3:07 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रम
Vangmay Aligarh October 2014


  • सम्पादकीय

वाङ्मय त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका - जुलाई २०१४

6 जुल॰ 2014, 12:54 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 6 जुल॰ 2014, 1:07 am अपडेट किया गया ]

अनुक्रम
  • सम्पादकीय
  • अपवित्र आख्यान: मुस्लिम (अल्पसंख्यक) समाज की पीड़ा - सतीश कुमार
  • प्रेमचंद की कहानियों में मनोवैज्ञानिक संदर्भ - भारती
  • सुपर हाइवे बनाम ज़ीरो रोड - डा. संजीव कुमार जैन / डा. वारिश जैन
  • नासिरा शर्मा की कहानियों में राजनीतिक बोध - यशवंती
  • चंद्रकांत देवतालेकृत पत्थर फेंक रहा हूँ में व्याप्त समाज - कमल
  • रैदास के साहित्य में लोकमंगल की भावना: एक अध्ययन - दुर्गा खत्री
  • स्त्री-विमर्श: एक अध्ययन - अशोक कुमार
  • वरूण ग्रह की धरती पर: एक मूल्यांकन - डा. प्रदीप लाड़
  • समकालीन परिवेश में राजेश जोशी का योगदान - उर्मिला देवी
  • अज्ञेय, मुक्तिबोध और सर्वेश्वर: कितने दूर, कितने पास - अरुण प्रसाद रजक
  • स्त्री-विमर्श और हिन्दी साहित्य - दिनेश कुमार
  • प्रेमचंद की सामाजिक दृष्टि पर गाँधीवाद का प्रभाव - डा. सरिता रानी
  • उपेन्द्रनाथ अश्क: एक बहुरंगी व्यक्तित्व - विकेश कुमार मिश्र
  • आधुनिक युग के शैक्षणिक क्षेत्र में भारतीय नारी के आदर्श - एन. मोहना / डा. शशि प्रभा जैन
  • आदिवासी विमर्श - डा. तसनीम पटेल
कहानी / व्यंग्य / कविता / समीक्षा 
  • एक और औरत का वेश्या होना - इंदुमति सरकार
  • तस्वीर पर चढ़े फूल - फरहा सईद
  • कोयला भई न राख - डा. हस्सान आज़मी
  • आकाश हो गई, स्वार्थ - देवेन्द्र कुमार मिश्र
  • मैट्रिक फेल-बी.ए. पास करे - केवल गोस्वामी
  • औरतों की दुनिया का सच - डा. शिवचंद प्रसाद
  • साहित्य और समाज के लोकतांत्रिककरण की प्रक्रिया का नया आख्यान - सुनील यादव
  • मुस्लिम विमर्श: साहित्य के आईने में - रमाकांत राय

वाङ्मय त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका - अप्रैल २०१४

8 अप्रैल 2014, 11:13 am द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 19 दिस॰ 2014, 9:23 am अपडेट किया गया ]

vangmay traimasik hindi patrika - april 2014
अनुक्रम

  • सम्पादकीय
  • स्त्री-पुरुष संबंधों के सन्दर्भ में निर्मल वर्मा की कहानियां - निर्मला देवी
  • कन्हैयालाल अग्रवाल के ग़ज़ल-संग्रह धीमी-धीमी आँच में संवेदना - कविता भदौरिया
  • राष्ट्र भाषा हिन्दी एवं स्वतंत्रता आन्दोलन - संगम वर्मा
  • डॉ. रांघेय राघव के उपन्यास में स्त्री शिक्षा और विमर्श - माला कुमारी
  • साहित्य और विज्ञान का अंतर्संबंध - श्रीमती वनदेवी दु. हुच्चण्णवर
  • समताधिस्ठित समाज में कबीर का योगदान - डॉ. (श्रीमती) तसनीम पटेल
  • साम्प्रदायिकता का सच और भारतीय समाज - अभिषेक कुमार पाण्डेय
  • संस्कृत में वाणिज्य - डॉ. ममता गुप्ता
  • उग्र के उपन्यासों में स्त्री संवेदना - डॉ. हरिनाथ
  • रमणिका गुप्ता की कविताओं में समकालीन यथार्थबोध - डॉ. शिव कुमार सी.एस. हडपद
  • नारी चेतना - यशवंती
  • डॉ. शंकर शेष की रंगदृष्टि: फंदी नाटक के विशेष सन्दर्भ में - डॉ. हर्षद कुमार चौहान
  • बाहिश्ते ज़हरा: ईरान का विस्थापन और तालिबानीकरण - करिश्मा अय्यूब पठाण
  • आधुनिक हिन्दी काव्यधारा में उपेन्द्रनाथ अश्क का योगदान - विकेश कुमार मिश्र
  • लोकतत्व की स्थापना के संदर्भ में हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का चिन्तन - डॉ. रमाकांत
  • हितोपदेश, पंचतंत्र और कादम्बरी की किस्सागोई - राकेश रंजन
  • डॉ. नरेन्द्र कोहली के महाभारताश्रित उपन्यासों में जीवन मूल्य - प्रा. जयवंत दगा पवार
  • शंकर शेष के नाटकों में मिथकीय चेतना - प्रा. पवार आनंदराव राजाराम

कहानी / व्यंग्य / कविता / ग़ज़ल / समीक्षा

  • नमकीन प्रेम - सपना मांगलिक
  • अच्छा बेटा - सुषम बेदी
  • शव पेटिका (अनुवादक-सत्यनारायण राव) - एडोल्फ डिग्सिनेस्की
  • मत मर तू नेता - प्रभुदयाल श्रीवास्तव
  • दमित इच्छा / मुस्कुराहट - दीप्ति शर्मा
  • असली जीवन शब्दों में असली मृत्यु शब्दों में - रश्मि प्रभा
  • ग़ज़ल - सैयद महमूद अहमद
  • समकालीनता के परिदृश्य में नर्द कवितायेँ - डॉ. राधेश्याम सिंह
  • संवादधर्मिता साक्षात्कार का सौंदर्य है - सुशील सिद्धार्थ
  • संवेदना के क्षय से चिंतित कविताएं - डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ
  • तमन्नाओं के कारोबार से कुछ अधिक - रमाकान्त राय

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वाङ्मय आदिवासी विशेषांक - २

5 फ़र॰ 2014, 10:42 pm द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 6 जुल॰ 2014, 1:10 am अपडेट किया गया ]

vangmay adivasi visheshan - 2
अनुक्रम 


  • सम्पादकीय 
  • हिन्दी के आदिवासी जीवन पर केन्द्रित उपन्यासों का उद्भव और विकास - प्रो. बी. के. कलासवा
  • समकालीन हिन्दी उपन्यास और दिकू समाज का आदिवासी चिंतन - रोहिणी अग्रवाल 
  • संजीव के उपन्यास और आदिवासी समाज - मधुरेश 
  • अग्निगर्भ: आदिवासी संघर्ष का दहकता दस्तावेज - रोहिताश्व 
  • रक्तयात्रा: मानवीय रक्त का पुरश्चरण - प्रो. रामकली सराफ/सत्येंद्र कुमार यादव
  • पाले का घर पलामू: एक अवसाद कथा - वंदना झा 
  • सदन कृत नदी के मोड़ पर: एक अध्ययन - अरुण कुमार दामोदर
  • हिमांशु जोशी का कथा साहित्य और हाशिए के लोग - डा. शिवचंद प्रसाद 
  • भारतीय जनतंत्रा: सत्तातंत्रा बनाम हाशिए के लोग - डा. नीरू 
  • जहाँ बाँस फूलते हैं: जनजातीय संघर्ष और विद्रोह - सुभाष कुमार गौतम
  • आदिवासी कल और आज - गुलशन बानो 
  • आदिमकालीन समाज के सच से जूझते हुए... - सगीर अशरफ 
  • भूलों को याद करता हुआ (गमना उपन्यास) - खान अहमद फारुक 
  • आदिवासियों के रीति-रिवाजों, समारोहों और पर्वों का प्रामाणिक दस्तावेज: शालवनों का द्वीप - डा. एम. फ़ीरोज़ अहमद 
  • आज़ादी के लिए उठे हाथों की पहली दस्तक: बाजत अनहद ढोल - डा. नगमा जावेद मलिक 

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वाङ्मय आदिवासी विशेषांक - १

5 फ़र॰ 2014, 10:35 pm द्वारा वाङ्मय बुक्स, अलीगढ़ प्रेषित   [ 6 जुल॰ 2014, 1:11 am अपडेट किया गया ]

Vangmay adivasi visheshank 1
अनुक्रम 
  • सम्पादकीय 
  • समकालीन आदिवासी उपन्यासों की दशा व दिशा - श्रीप्रकाश मिश्र
  • एक उलगुलान की यात्रा कथा - डा. आदित्य प्रसाद सिंहा
  • आदिवासी जीवन में वनों का महत्त्व - डा. सुरेश उजाला 
  • रेगिस्तान का लोकरंग - प्रो. शैलेन्द्र कुमार त्रिपाठी
  • मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ अर्थात् जारी है शिव का कंठ नीला... - मूलचन्द सोनकर
  • साहित्य के विमर्श में आदिवासी समाज - बिपिन तिवारी 
  • आदिवासी समाज का जीवंत दस्तावेज: आमचो बस्तर 69 - डा. तारिक असलम ‘तस्नीम’
  • जंगल की गुहार: धपेल - डा. दया दीक्षित 
  • सागर लहरें और मनुष्य: नारी की भटकन का उपाख्यान - डा. रामशंकर द्विवेदी 
  • डूब और पार होने की व्यथा-कथा - प्रभाकर सिंह 
  • आदिवासियों का जमीनी राजनीतिक संघर्ष - केदार प्रसाद मीणा
  • आदिभूमिः धारदार लड़ाई का भोथरा अंत - श्याम बिहारी श्यामल
  • अंधेरे में भटक रही ज़िंदगियों में रोशनी भरने की कामयाब कोशिश - डा. श्रीकांत सिंह
  • कचनार: एक समीक्षात्मक अध्ययन - प्रेमशंकर सिंह
  • अल्मा कबूतरी में जनजातीय जीवन - डा. रमाकांत राय 
  • आदिवासी जीवन की मर्म-कथा: वन के मन में - डा. जागीर नागर 
  • मानवीय संदर्भों की कहानी: काला पादरी - डा. संजीव कुमार जैन 
  • हिन्दी उपन्यासों में आदिवासी जीवन की अभिव्यक्ति - राजेश राव 
  • आदिवासियों की वेदना एवं चेतना का नया पाठ - सुन्दरम् शांडिल्य

Keywords : Vangmay traimasik hindi patrika, Adivasi Visheshank - 1, Vangmay Books, Aligarh

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